क्या होगा अगर आप सोचना बंद कर दें तो ? जाने इसके पीछे की सच्चाई

क्या होगा अगर आप सोचना बंद कर दें तो ? जाने इसके पीछे की सच्चाई

दिमाग़ का काम ही है सोचना। कुछ करने से पहले उस बारे में सोचना बहुत जरूरी होता है उस विषय में पहले अच्छे से जानकारी प्राप्त करने के बाद ही उस विषय में काम करना चाहिए। क्या होगा अगर आप सोचना ही बन्द कर दें क्या कभी आपने इस विषय में सोचा है? सवाल वैसे तो अजीब सा है लेकिन जवाब अजीब नहीं है। आज हम आपको इसी बारे में जानकारी देने की कोशिश करेंगे। किसी विषय में ज्यादा सोचना भी ठीक नहीं होता। और कुछ न सोचना भी ठीक नहीं होता।तो व्यक्ति करें तो करें क्या। दरअसल हम जब किसी विषय में सोचते हैं तो हमारी दिमाग़ की नसों में रक्त का संचार जोर से होने लगता है। एवं नये नये न्यूरॉन तैयार होने लगते हैं। पर अगर कोई व्यक्ति सोचना ही बन्द कर दें तो उसके दिमाग में नये न्यूरॉन तैयार नहीं हो पाते हैं।

जब व्यक्ति के दिमाग में नये न्यूरॉन बनते हैं तो व्यक्ति जिस विषय में सोच रहा होता है इसका विकास होने लगता है। इस कारण जब हम एक विषय को लेकर सोचने लगते हैं तो उस विषय की जानकारी मिलती रहती है। एवं धीरे धीरे वह विषय आसान लगने लगता है। लेकिन अगर आप किसी विषय के बारे में पहले से ही सोच लें कि ये मुझसे नहीं हो पाएगा।तो वो विषय और भी कठीन लगने लगता है।

रिसर्च के अनुसार दिमाग़ में न्यूरॉन का विकास बचपन में सबसे ज्यादा होता है। जब कोई बच्चा जन्म लेता है तब केवल उसे हंसना और रोना ये दोनों अवस्था ही पता होती है। इसके बाद वो हर पल कुछ न कुछ सिखाता रहता है और इस कारण उसके दिमाग में न्यूरॉन का निर्माण होने लगता है।

बचपन में सीखी बातें व्यक्ति कभी नहीं भूलता है। जबकि उम्र बढ़ने के साथ साथ व्यक्ति सब कुछ याद नहीं रख पाता है। बचपन में सीखी हुई A,B,C,D ,सबको बुढ़ापे तक याद रहती है। पर बड़े कक्षा की पढ़ाई बच्चे एक क्लास से दूसरे क्लास में जाते ही भूल जाते हैं।

आपने ये भी देखा होगा कि बच्चे टेक्निकल बातें ज्यादा समझते हैं। घर में नया मोबाइल आने पर बड़ों को उससे छेड़छाड़ करने में डर लगता है पर उसी परिवार का कोई भी बच्चा बड़ी आसानी से मोबाइल के सिस्टम को समझ जाता है।

उम्र बढ़ने के साथ साथ अगर कोई व्यक्ति अपने दिमाग का काम कम कर दें तो उसके सोचने समझने की क्षमता जल्द ही कम होने लगती है। वहीं अगर कोई व्यक्ति अपना समय किताबें पढ़ने या प्राणायाम करने में बिताए तो उनका दिमाग ऐक्टिव रहता है।

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