तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्रि का है विशेष महत्व, जाने

गुप्त नवरात्रि

22 जून से गुप्त नवरात्रि आरंभ हो चुके हैं.. जो 22 जून से चलकर 29 जून तक रहेंगे.. हिंदू धर्म के अनुसार नवरात्रि का पर्व मुख्य पर्वो में से एक माना जाता है. हिंदू परंपरा के अनुसार 1 वर्ष में चार बार नवरात्रि आते हैं. जिसमें से दो गुप्त नवरात्रि होते हैं. और दो सामान्य नवरात्रि होते हैं. आज हम बात करने वाले हैं गुप्त नवरात्रि के बारे में. पहला गुप्त नवरात्रा माघ महीने में आता है, तथा दूसरा गुप्त नवरात्रि आषाढ़ माह में मनाए जाते हैं. तो आइए जानते हैं तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्रों का विशेष महत्व.

तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्रि का है विशेष महत्व, जाने

आपकी जानकारी के लिए बता दे गुप्त नवरात्रों में देवी की पूजा गुप्त रूप से ही की जाती हैं. नवरात्रों में तांत्रिकों को सिद्धियां प्राप्त करने के लिए गुप्त रूप से देवी की आराधना करने के लिए विशेष अवसर मिलता है. जिसमें यह अपने सिद्धियां प्राप्त कर सकते हैं. गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रों से अलग होते हैं. इसमें नौ देवी की जगह 10 देवियों की पूजा की जाती है.

गुप्त नवरात्रि मे 10 देवियो की होती है पूजा

बता दें कि नवरात्रि में जहां 9 देवियों की पूजा का विशेष प्रधान प्रावधान है. वहीं गुप्त नवरात्रों में 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है. इसी के साथ ही आपको बता दें कि 10 महाविद्याओं में से माँ काली, माँ तारा देवी, माँ त्रिपुरा सुंदरी, माँ भुवनेश्वरी, माँ छिन्नमस्ता, माँ त्रिपुरा भैरवी, माँ धूमावती, माँ बगलामुखी, माँ मातंगी और माँ कमला देवी आदि है. बता दें कि इन गुप्त नवरात्रों में तंत्रमंत्र आदि से मां भगवती की पूजा आराधना की जाती है. और तांत्रिक साधनाएं भी संपूर्ण की जाती है.

गुप्त रूप से ही की जाती है गुप्त नवरात्रि मे पूजा

इसके साथ ही आपको बता दें कि अषाड माह के नवरात्रि में देवी की पूजा तंत्र-मंत्र के लिए की जाती है. नवरात्रों में देवी मां के हवन-पूजन आदि कर्म रात्रि के समय गुप्त रूप से किए जाते हैं. जैसा कि आप सभी को मालूम है कि गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली शक्ति की साधना के बारे में जहां कुछ अधिक लोग नहीं जानते है, तो वही इनसे जुड़ी साधना आराधना को भी लोगों से गुप्त ही रखा जाता है. शास्त्रों के अनुसार माने तो इन नवरात्रों में साधना को जितना भी गुप्त रखा जाएगा मां भगवती की उतने ही कृपा उस साधक पर बनी रहती है. इसीलिए इन्हें गुप्त नवरात्रि का दर्जा दिया जाता है.

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