Swami Vivekananda’s Birthday: स्वामी विवेकानंद जी की इस कहानी से मिलती है नारी सम्मान की सीख

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Swami Vivekananda’s Birthday: स्वामी विवेकानंद जी की कहानी

Swami Vivekananda’s Birthday: स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 1863 में 12 जनवरी को कोलकाता में हुआ था. इस दिन को भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. स्वामी विवेकानंद भारत के एक सच्चे देशभक्त और सन्यासी के रूप में भी जाने जाते हैं. इसके साथ ही वह वेदांत के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु भी थे. जिन्होंने सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व भी किया है. स्वामी विवेकानंद जी ने सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार को भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में फैलाया है जिसकी वजह से वह जाने जाते हैं.

Swami Vivekananda's Birthday: स्वामी विवेकानंद जी की इस कहानी से मिलती है नारी सम्मान की सीख

इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद जी अपनी एक कहानी की वजह से भी जाने जाते हैं. जिसमें उन्होंने नारी सम्मान की बात की है. आज उसी कहानी के बारे में हम आप लोगों को बताने जा रहे हैं. जिससे लोग हमेशा ही स्वामी विवेकानंद जी से प्रभावित होते है. ठीक वैसे ही है एक विदेशी स्त्री भी स्वामी विवेकानंद इसे प्रभावित हुई थी तो आइए जानते हैं इस कहानी के बारे में. 

Swami Vivekananda’s Birthday special: Story(स्वामी विवेकानंद जी के जन्म दिवस पर उनकी ख़ास कहानी)

स्वामी विवेकानंद जी की प्रसिद्धि देश विदेशों में फैली हुई थी. यह बात उस समय की है जब विवेकानंद जी एक समारोह में भाग लेने के लिए विदेश गए थे. उनके उस समारोह में विदेशी मेहमान भी आए हुए थे. जिनमें से एक महिला उनके वचनों से काफी ज्यादा प्रभावित हुई और उनके पास आकर बोली कि “मैं आपसे शादी करना चाहती हूं ताकि मुझे भी आपके जैसा ही एक गौरवशाली पुत्र प्राप्त हो”.

जिसके बाद स्वामी विवेकानंद जी ने उनका जवाब देते हुए कहा कि “क्या आप जानती है कि मैं एक सन्यासी हूं तो भला मैं कैसे आपसे शादी कर सकता हूं, अगर आप चाहो तो मुझे अपना पुत्र बना लो, इससे मैं सन्यासी भी बना रहूंगा और आपको मेरे जैसा गौरवशाली पुत्र भी मिल जाएगा” इतनी बात सुनते ही वह विदेशी महिला स्वामी विवेकानंद जी के चरणों में झुक गई और बोली कि आप धन्य हैं. आप मेरे ईश्वर के समान है. जो किसी भी परिस्थितियां संकट में अपने धर्म से विचलित नहीं होते हैं. 

स्वामी विवेकानंद जी की इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि एक सच्चा पुरुष वही होता है जो हर परिस्थिति में  स्त्री का सम्मान करें.
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