swami vivekananda jayanti: जब कुत्ते को घुमाने से समझाया इंसान को सही रास्ता, जाने

swami vivekananda jayanti

swami vivekananda jayanti: स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 में कोलकाता में हुआ था. इनके जन्मदिवस को भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. विवेकानंद जी ने पूरी दुनिया में सनातन धर्म का प्रचार प्रसार किया है. इसके साथ ही इनसे जुड़ी कहानियां भी प्रसिद्ध है. इनमें से एक कहानी के बारे में हम आप लोगों को बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं इस कहानी के बारे में विस्तार से. 

swami vivekananda jayanti

swami vivekananda jayanti special story :

एक बार की बात है जब स्वामी विवेकानंद जी अपने आश्रम में गहरी निंद्रा में सो रहे थे. तभी वहां पर एक व्यक्ति बेहद दुखी और निराश वान अवस्था में आता है. जो आते ही स्वामी विवेकानंद जी के चरणों में गिर पड़ता है और स्वामी विवेकानंद जी से बोलता है कि “मैं अपने इस जीवन में खूब मेहनत कर रहा हूं इसके साथ ही में मन लगाकर भी काम कर रहा हूं लेकिन इतनी मेहनत और लगन के बाद भी मुझे अभी तक सफलता नहीं मिली है”. 

स्वामी विवेकानंद जी उनकी यह बात समझ जाते हैं और उन्हें कहते हैं कि ठीक है तुम मेरे इस पालतू कुत्ते को थोड़ी देर घुमा कर लाओ. इतने में मैं आपकी समस्या का समाधान ढूंढता हूं. इतना कहने के बाद वह व्यक्ति उस कुत्ते को अपने साथ घुमाने के लिए लेकर चला जाता है. काफी समय बीतने के बाद वह व्यक्ति वापस स्वामी जी के पास आता है तो उस समय स्वामी जी उस व्यक्ति से पूछते हैं कि कुत्ता इतना क्यों हाफ रहा है ? जबकि तुम जरा से भी थके नहीं लग रहे हो आखिर ऐसा क्या हुआ? 

स्वामी विवेकानंद जी इस बात पर वह व्यक्ति उन्हें कहता है कि मैं तो सीधा रास्ते से चल रहा था. जबकि कुत्ता इधर-उधर भागता जा रहा था कुछ भी देखता तो वे उसकी और दौड़ पड़ता. इसी कारण यह कुत्ता इतना ज्यादा थका है.

इतनी बात कहने के बाद स्वामी विवेकानंद जी मुस्कुराते हुए उस व्यक्ति को कहते हैं कि यही तुम्हारे प्रश्नों का सही जवाब है. तुम्हारी सफलता की मंजिल तो है लेकिन तुम मंजिल की बजाय इधर-उधर जाने में समय व्यर्थ करते हो और जीवन में कभी सफल नहीं हो पाते हो उनकी यह बात सुनकर वह व्यक्ति पूर्ण रूप से समझ गया की सफल होना है तो हमें अपनी मंजिल पर ध्यान देना होगा. 

कहानी से सीख

स्वामी विवेकानंद जी की इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जो भी हमें बनना है. जो भी हम हमें करना है. हम उस पर ध्यान नहीं देते हैं और दूसरे को देख कर उसके जैसा करने लग जाते हैं. जिसकी वजह से हम अपनी सफलता की मंजिल से भटकते चले जाते हैं. इसलिए अगर आपको जो अपनी जिंदगी में सफल होना है तो आपको अपना लक्ष्य और ध्यान केंद्रित करना होगा. 
ये भी जाने- स्वामी विवेकानंद जी की ये 5 बाते ला देगी आपके जीवन में बड़ा बदलाव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *