वट सावित्री व्रत

महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है, मान्यता है कि इस व्रत के रखने से पति की पर आए संकट चले जाते है. आयु लंबी हो जाती है. यही नहीं उनके दांपत्य जीवन में भी आने वाली परेशानियां टल जाती है. तो आइए जानते हैं इस व्रत के बारे में और इसकी पूजन विधि और सामग्री के बारे में विस्तार से.

सुहागिन महिला अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए रखती है वट सावित्री व्रत, जाने

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस दिन सावित्री और सत्यवान की कथा सुनने का विधान है. मान्यता है कि इस कथा के सुनने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. अगर पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाए तो सावित्री मृत्यु के देवता यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थी. साथ ही आपको बता दें कि वट सावित्री व्रत के दिन ही शनि जयंती भी मनाई जाती है.

बता देगी इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. और वट यानी बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा-अर्चना करती है. इस पूजा अर्चना के दौरान सावित्री कथा सुनने का भी प्रावधान है. इस कथा के सुनने के पश्चात ही महिलाएं वट के वृक्ष के नीचे से उठकर अपने घर जाती हैं इतना ही नहीं कथा सुनने से पूर्व महिलाए वट वृक्ष के पत्तो के आभूषण पहनती है. इस व्रत के करने से महिला के जीवन में और उसके पति के जीवन में सुख और शांति का प्रवेश होता है. जिससे महिलाएं अपना वैवाहिक जीवन सुखद एवं संपन्न बनाती है.

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