परिवार के पास दो वक्त की रोटी खाने के लिए भी मुश्किल से पैसा हो पाता था…

परिवार के पास दो वक्त की रोटी खाने के लिए भी मुश्किल से पैसा हो पाता था...

घर्ष करके ही इंसान कुछ बन पाता है. अगर किसी को अपना जीवन बदलना है तो निश्चित रूप से उस व्यक्ति को संघर्ष करना ही पड़ता है. इस दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो पैदा ही अमीर होते हैं.

अक्सर हम सभी गरीब पैदा होते हैं और इसमें हमारा कोई भी दोष नहीं होता है लेकिन अगर हम गरीब मर जाएं तो निश्चित रूप से इसमें हमारी ही गलती होती है. इसीलिए कहा गया है कि गरीब पैदा होना कोई पाप नहीं है लेकिन गरीब मरना निश्चित रूप से पाप होता है.

गरीब मरना निश्चित रूप से पाप होता है

Getting dropped from Team India affected my form: Umesh Yadav ...

आज हम आपको इंडियन क्रिकेट टीम के एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी बताने वाले हैं जिसने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है. परिवार के पास दो वक्त की रोटी खाने के लिए भी मुश्किल से पैसा हो पाता था लेकिन इसके बावजूद भी इस इंडियन क्रिकेटर ने संघर्ष करके आज अपने परिवार और अपने भाई बहनों की पूरी जिंदगी बदल दी है.

आज ये खिलाड़ी करोड़ों में खेल रहा है और परिवार को इस पर गर्व है. आइए देखते हैं कि कौन है वह खिलाड़ी जो गरीबी में पला, जिसके पास कॉलेज के लिए पैसे नहीं थे लेकिन इस खिलाड़ी ने हार नहीं मानी और आज इतना बड़ा इन्सान बन गया है-

उमेश यादव के पिता कोयला खान में काम करते थे

It has been the opposite in my case' - Umesh Yadav slams BCCI's ...

इंडियन क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज उमेश यादव के पिता कभी कोयले की खदान में काम किया करते थे. उमेश यादव के पिता का नाम तिलक यादव है और इनके पिता तिलक यादव उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से संबंध रखते हैं लेकिन कोयला खदान में नौकरी के कारण तिलक यादव नागपुर के पास खापरखेड़ा गांव में रहा करते थे.

इस गांव को कभी खदान में काम करने वालों का गांव बोला जाता था. तिलक यादव की इच्छा थी कि उनके बच्चे पढ़ें और कॉलेज जाएं. उमेश यादव सरकारी नौकरी करें, सेना या पुलिस में भर्ती हो जाए.

पुलिस या सेना में भर्ती हो जाना

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उमेश यादव की लंबाई और कद काठी भी ऐसी थी कि इनको पुलिस या सेना में भर्ती हो जाना चाहिए था लेकिन शायद उमेश यादव की किस्मत में कुछ और ही लिखा था. एक समय ऐसा भी था जब उमेश यादव के परिवार के पास सीमित संसाधन हुआ करते थे. परिवार बड़ा था और बच्चों को खिलाने के लिए बमुश्किल गुजारा हो पाता था. उमेश यादव के पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वह अपने कॉलेज की फीस भर सकें.

2008 में पहली बार यादव को रणजी ट्रॉफी में खेलने का मौका मिलाऔर पहली पानी में इन्होंने 4 विकेट लिए थे. 2010 में उमेश यादव को आईपीएल के अंदर दिल्ली डेयरडेविल्स ने खरीदा था. इसके बाद इन्होनें पीछे मुड़कर नहीं देखा.

उमेश यादव के बचपन की एक रोचक कहानी है कि उमेश यादव को घी खाने का काफी शौक था. घर में गाय थी तो उमेश यादव कई बार घर में से ही घी चुराकर खा जाया करते थे.

उमेश ने क्रिकेट के लिए अपने पिता से बोला था कि या तो ये गेंद हम सभी का जीवन बदल देगी या अब यह हमको बर्बाद कर देगी. लेकिन उमेश यादव ने बड़ा संघर्ष और मेहनत करके इन्डियन टीम में अपनी जगह बनाई है.

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