Happy Birthday Dada: सौरव गांगुली के 5 बड़े फैसले, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट को बदल कर रख दिया

Happy Birthday Dada: सौरव गांगुली के 5 बड़े फैसले, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट को बदल कर रख दिया

Happy Birthday Dada(Sourav Ganguly): भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट में दादा के नाम से मशहूर सौरव गांगुली अब 48 साल के हो गए हैं. इसके साथ ही आज हम सौरव गांगुली के उन पांच फैसलों पर नजर डालेंगे जिन्होंने भारतीय क्रिकेट के इतिहास को बदल कर रख दिया है. 

Happy Birthday Dada: सौरव गांगुली के 5 बड़े फैसले, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट को बदल कर रख दिया
Image Courtesy: Third Party

सौरव गांगुली भारतीय टीम के पूर्व कप्तान, शानदार वनडे सलामी बल्लेबाज और वर्तमान बीसीसीआई अध्यक्ष रह चुके हैं. इसके साथ ही वह 48 साल के हो गए हैं. इन्होंने वनडे मैचों में 11363 रन बनाए हैं जिसमें इन्होंने 22 शतक का सहारा लिया है. इसके साथ ही शुरु गांगुली भारत में अपनी बेहतरीन सलामी बल्लेबाजी की वजह से जाने जाते हैं. साल 2000 में भारतीय टीम में क्रांति लाने का सारा श्रेय सौरव गांगुली के ऊपर जाता है. भारत ने साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट सीरीज में हरा दिया था. वहीं इंग्लैंड को हराकर साल 2002 के नेटवेस्ट ट्रॉफी जीती थी. इसके साथ ही कई ऐसे रिकॉर्ड सौरव गांगुली ने अपने नाम के हैं जिन्हें तोड़ पाना मुश्किल है. तो आइए जानते हैं सौरभ गांगुली के उन फैसलों के बारे में जिन्होंने भारतीय टीम के इतिहास को बदल कर रख दिया. 

Happy Birthday Dada Special

1. 2001 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ लक्ष्मण को नंबर 3 पर भेजना

सौरव गांगुली हमेशा ही एक सहज कप्तान रहे हैं. उन्हें पता था कि लक्ष्मण एकमात्र ऐसे भारतीय बल्लेबाज है. जो ऑस्ट्रेलिया टीम के खिलाफ अगुवाई कर सकते हैं. भारत को पहले 3 दिन के रूप में अनुसरण करने के लिए कहा गया था. जिसमें सौरव गांगुली ने लक्ष्मण को बढ़ावा दिया था. जिसके साथ लक्ष्मण ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया था. जिसमें उनका साथ राहुल द्रविड़ ने दिया था. लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ ने पहले दिन चार के माध्यम से बल्लेबाजी की जिसमें उन्होंने 281 रन दर्ज की है. इस टेस्ट सीरीज के दौरान भारत 21 से जीत गया था. 

2. वीरेंद्र सहवाग को ओपनर बल्लेबाज के रूप में भेजना

सौरव गांगुली के कप्तान बनने से पहले वीरेंद्र सहवाग ने अपने जीवन में हमेशा ही मध्यक्रम में बल्लेबाजी की थी. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट से शुरुआत की थी. जिसमें इन्होंने नंबर 6 पर बल्लेबाजी करते हुए शतक जड़ा था. लेकिन इसी बीच सौरव गांगुली ने कुछ ऐसा देखा जो कोई और नहीं देख सकता था और उन्होंने वीरेंद्र सहवाग को भारत के लिए पहले बल्लेबाजी करने के लिए कहा उनका मानना था कि वीरेंद्र सहवाग की दाएं हाथ की बल्लेबाजी क्रम शीर्ष पर अधिक परिणाम ला सकती है. इसके साथ ही वीरेंद्र सहवाग ने ओपनर के रूप में बल्लेबाजी करनी शुरू कर दी. जिसके बाद उन्होंने भारतीय टीम को कई बार अपने दम पर जीत दिलाई है. इसके साथ ही वीरेंद्र सहवाग के बाद अभी तक कोई भी ओपनर बल्लेबाज उनकी जगह लेने में नाकामयाब ही रहा है. 

3. राहुल द्रविड़ को सलाह देना

एक समय पर भारतीय क्रिकेट टीम में एमएस धोनी नहीं थे तो इससे पहले राहुल द्रविड़ अपनी बेहतरीन कीपरिंग की वजह से जाने जाते थे. लेकिन उस समय राहुल द्रविड़ सिर्फ क्रम में अपनी बल्लेबाजी की वजह से जाने जाते थे. लेकिन सौरव गांगुली राहुल द्रविड़ को संतुलन बनाए रखने के लिए मध्यक्रम में बल्लेबाजी करने के लिए कहा जिसके बाद राहुल द्रविड़ के पास कप्तान की आज्ञा मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा सौरव गांगुली का यह कदम काफी ज्यादा सफल रहा. क्योंकि उन्होंने साल 2002 और 2004 के बीच इस क्रम में आकर भारत को कई बार जीत दिलाई है. इस क्रम में खेलकर राहुल द्रविड़ ने भारत की ओर से सर्वश्रेष्ठ वनडे पारियां निकाली है. 

4. महेंद्र सिंह धोनी का चयन करना

यह सिर्फ एक बड़ा संयोग ही हो सकता है कि भारत क्रिकेट इतिहास के दो सफल कप्तान एक ही दिन हुए थे. भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने महेंद्र सिंह धोनी का चयन अपने दम पर किया था. इसके साथ ही साल 2005 में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मैच में उन्होंने धोनी को नंबर 3 पर प्रमोट करने का फैसला किया था. जिसमें महेंद्र सिंह धोनी ने 148 रन बनाकर क्रिकेट में नया कीर्तिमान हासिल कर लिया था. इसके बाद कभी भी महेंद्र सिंह धोनी पीछे नहीं हटे. 

5. युवा खिलाड़ियों का किया हमेशा समर्थन

सौरव गांगुली की कप्तानी मिलने के बाद उस समय के भारतीय टीम के युवा खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, जहीर खान, युवराज सिंह और महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ी खुशियों से खिल गए थे. सौरव गांगुली हमेशा से ही युवा खिलाड़ियों को ज्यादा पसंद करते थे. जिसकी वजह से सभी युवा खिलाड़ी भी सौरव गांगुली का पूरा साथ देते थे. शुरू गांगुली हमेशा से ही सभी भारतीय क्रिकेटर के आइडियल रहे हैं. 

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