धनतेरस के दिन जलाएं दीपक, खत्म हो जाएगा अकाल मृत्यु का डर

धनतेरस के दिन यमराज के लिए दीपक जलाया जाता है। लेकिन कुछ लोगों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर धनतेरस के ही दिन यमराज की पूजा क्यों जाती है ? इसके पीछे कई बड़ी कथाएं प्रचलित है आज ऐसे ही डबल्यूके कहानी के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। 

कथाओं के अनुसार हिम नाम के एक राजा के पुत्र हुआ। जिसके बाद ज्योतिषी ने बताया कि यह पुत्र विवाह के चौथे दिन मर जाएगा। इसके बाद राजा काफी बड़ी परेशानी में रहने लगा लेकिन पुत्र का विवाह तो करना ही था। जिसके राजा ने अपने पुत्र का विवाह करा दिया लेकिन शादी के चौथे दिन सभी को राजकुमारी मृत्यु का डर सताने लगा लेकिन इसी दौरान राजा के बेटे की पत्नी बिना चिंता किए मां लक्ष्मी जी की पूजा करने लगी। क्योंकि वह महालक्ष्मी की एक सच्ची भक्त थी। उसकी पत्नी ने घर के चारों ओर दीपक जलाएं और भजन किया। 

भजन करने के दौरान उस दिन उस दिन सर्प के अवतार में यमराज राजकुमार को डसने के लिए उनके घर आए लेकिन दीपक की रोशनी में उनकी आंखें चौंधिया गई और उन्हें कुछ भी समझ में नहीं आया। इसी दौरान राजकुमार की पत्नी के पास पहुंच गए जहां पर वह भी मां लक्ष्मी की पूजा करने लगे। लेकिन सुबह होने पर तुरंत के रूप में यमराज को खाली ही लौटना पड़ा। क्योंकि मृत्यु का समय टल गया था इससे राजकुमार की पत्नी के कारण उन्हें दीर्घायु प्राप्त हुई। तभी से यमराज के लिए दीप जलाने की प्रथा पर चलन में आ गई थी। 

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