भीष्म अष्टमी: इस दिन त्यागे थे महाभारत के योद्धा ने अपने प्राण, होती है हर इच्छा पूरी

भीष्म अष्टमी: इस दिन त्यागे थे महाभारत के योद्धा ने अपने प्राण, होती है हर इच्छा पूरी

माघ माह के शुक्ल पक्ष के अष्टमी के दिन भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागे थे. इस दिन को भीष्म अष्टमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भीष्म पितामह ने अपनी मर्जी से अपने प्राणों का त्याग किया था. जब महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ जब भगवान सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण हुए थे. तब भीष्म पितामह इस दुनिया से चले गए थे. भीष्म पितामह को याद करने के लिए ही यह व्रत रखा जाता है. 

भीष्म अष्टमी के दिन क्या करना चाहिए, जाने

भीष्म पितामह हमेशा से ही सत्य का साथ देते थे. इसके साथ ही अपने पिता के प्रति उनका प्रेम अटूट था. जिसकी वजह से उन्हें अपने पिता से इच्छा मृत्यु का आशीर्वाद प्राप्त हुआ था. इसके साथ ही हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भीष्म पितामह का असली नाम देवव्रत था. भीष्म पितामह जी ने गंगाजल को हाथ में लेकर पूरी जिंदगी अविवाहित होने की कसम खाई थी. जिसे उन्होंने निभाई भी थी. 

भीष्म पितामह महाभारत के सबसे महान योद्धा रहे हैं. इन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में ब्रह्मचर्य जीवन का पालन किया. इसके साथ ही इस दिन भीष्म के निमित कुश, तिल व जल लेकर तर्पण करना चाहिए. इस दिन व्रत रखने से गुणगान संतान की प्राप्ति व मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही आपके द्वारा किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. इसके साथ ही मान्यता यह भी है कि इस दिन पितृदोष भी खत्म हो जाते हैं.

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