भारतीय सेना द्वारा किए गए हथियार प्रयोग के बारे में नहीं जानते होगे आप, पाकिस्तानी सेना में बैठ गया था खौफ़

26 जुलाई 1999 में भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध जीत लिया था. कारगिल की लड़ाई शुरू होने से पहले पाकिस्तानी घुसपैठियों को भगाने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया गया था. जिसके बाद से ही इस दिन को कारगिल विजय दिवस के रूप में याद किया जाता है. इस दौरान 5000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत की एलओसी पर कब्जा कर लिया था. जिसे भगाने के लिए भारत की वायुसेना और थलसेना एकजुट हो गई थी और पाकिस्तानी के सैनिकों को मार कर भगा दिया गया था. 

इस युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों की ओर से बहुत जबरदस्त गोलाबारी की गई थी. इसमें भारतीय सैनिकों द्वारा चलाई गई राइफल, ऑटोमेटिक गन द्वारा की गई फायरिंग के बारे में तो अहम जानकारी नहीं है. लेकिन इसी दौरान भारतीय थल सेना और वायु सेना द्वारा मिसाइल एवं मोर्टर, तोपों व रॉकेट का इस्तेमाल किया गया था. इस युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ mig-29, mig-27 और मिराज 2000 जैसे लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया था. जहां पर पाकिस्तानी सेना ने कब्जा किया था वहां पर बम गिराए गए थे. 

इसके साथ ही मिग 29 की सहायता से पाकिस्तान के कई अहम ठिकानों पर आर 77 मिसाइलों से हमला किया गया था. जिसमें पाकिस्तान की सेना के पैर उखड़ गए थे. इस युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में रॉकेट और बमों का इस्तेमाल किया गया था. इस युद्ध के दौरान करीब 2,50,000 गोले पाकिस्तानी सेना के ऊपर दागे गए थे. वहीं 5,000 बम फायर करने के लिए 300 से ज्यादा मोर्टार, रॉकेट और तोपों का इस्तेमाल किया गया था. इस युद्ध के दौरान लगभग 17 दिनों में हर रोज प्रति मिनट पर एक राउंड फायर किया गया. जिसकी सहायता से पाकिस्तानी सेना से लेकर पाकिस्तान के नेताओं में भी भारतीय सेना का खौफ पैदा हो गया था. इस युद्ध से हारने के बाद पाकिस्तान को खतरा था कि कहीं भारत पाकिस्तान पर कब्जा ना कर ले. इसके लिए पाकिस्तान ने दूसरी बड़े देशों से मदद भी मांगी थी. 

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