id ul fitar: क्या है ईद उल फितर का महत्व और मकसद, जाने

ईद उल फितर

ईद उल फितर के दिन लोग जल्दी उठकर नए कपड़े पहन कर मस्जिद में जाते हैं. और नमाज अदा कर के एक दूसरे को बधाई देते हैं. लेकिन इस बार कोरोनावायरस की वजह से यह पर्व घर पर ही मनाया जाएगा क्योंकि हम गलती से भी इस महामारी को अपने घर में और गली तक ना ले जा सके. इस बार ईद उल फितर का त्योहार भी सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए मनाया जाएगा. तो आइये जानते हैं इस त्यौहार के महत्व और मकसद के बारे में.

क्या है ईद उल फितर का महत्व

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईद उल फितर का त्योहार सबसे पहले क्षेत्र 624 ईसवी में मनाया गया था. जब पैगंबर हजरत मोहम्मद ने भद्र के साथ युद्ध में जीत हासिल की थी. आपको बता दें रमजान के पाक महा में व्यक्ति गर्मियों में भूख बर्दाश्त करता है. उसी प्रकार जीवन में घटने वाली सभी परिस्थितियों को बर्दाश्त करना होता है. ईद उल फितर त्याग की भावना समझता है और यह भी बताता है, कि इंसानियत के लिए अपने इच्छाओ का त्याग करना चाहिए. ताकि एक बेहतर समाज को बनाया जा सके. हमेशा भाई चारे के साथ रहना चाहिए ताकि हर घर में सुख शांति रहे.

ईद उल फितर का मकसद

इसके साथ ही आपको बता दें कि मुस्लिम समुदाय का इस पर्व को मनाने के लिए एक मकसद भी है. जो पाक “कुरान” के अनुसार रमजान के महीने में रोजा रखने के बाद अल्लाह अपने बंदों की ख्वाहिश को पूरा करता है और इनाम देता है. ख्वाहिश और इनाम के इस दिन को ईद उल फितर कहा जाता है. इस दिन लोग गरीबों और जरूरतमंदों की भी मदद करते हैं. जिसे जकात या दान कहते हैं. इसी जकात से उन जरूरतों को पूरा किया जाता है और जिससे इस पर्व का बराबरी का मकसद पूरा हो सके.

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